मकर संक्रांति 2025: तिथि, महत्व और अनुष्ठान
मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह पर्व शीत ऋतु की समाप्ति और दिन के बढ़ने की शुरुआत का प्रतीक है, जो नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है।
मकर संक्रांति 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य प्रातः 8 बजकर 55 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। दान-पुण्य के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 7:15 बजे से दोपहर 1:25 बजे तक रहेगा, जिसमें स्नान, ध्यान और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है:
धार्मिक महत्व: महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन ही प्राण त्यागे थे, जिससे यह दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।
सूर्य उपासना: इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है।
दान-पुण्य: मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
मकर संक्रांति के अनुष्ठान
इस पर्व पर विभिन्न अनुष्ठानों का पालन किया जाता है:
स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।
दान: तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
खिचड़ी भोज: इस दिन खिचड़ी बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है और परिवार सहित उसका सेवन किया जाता है।
पतंगबाजी: देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने की परंपरा है, जो उत्सव में आनंद और उल्लास भरती है।
क्षेत्रीय विविधताएं
भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है:
पोंगल: तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें नई फसल की पूजा की जाती है।
लोहड़ी: पंजाब में मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व लोहड़ी का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें आग जलाकर नृत्य और गीत गाए जाते हैं।
उत्तरायण: गुजरात में इस दिन को उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है, जहां पतंग उड़ाने की विशेष परंपरा है।
मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथाएं
इस पर्व से संबंधित कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इसके महत्व को और बढ़ाती हैं:
भीष्म पितामह की कथा: महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही प्राण त्यागे थे, जिससे यह दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।
गंगा अवतरण: मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे गंगा स्नान का विशेष महत्व है।
मकर संक्रांति के वैज्ञानिक पहलू
मकर संक्रांति खगोलीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है:
सूर्य का उत्तरायण: इस दिन से सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर गमन करते हैं, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
मौसम परिवर्तन: यह समय शीत ऋतु के समापन और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है, जिससे कृषि कार्यों में भी बदलाव आता है।
मकर संक्रांति के स्वास्थ्य लाभ
इस पर्व पर तिल और गुड़ के सेवन की परंपरा है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं:
तिल: तिल में कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत करते हैं।
गुड़: गुड़ आयरन का अच्छा स्रोत है, जो रक्त की गुणवत्ता में सुधार करता है और पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
मकर संक्रांति के पर्यावरणीय पहलू
इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा है, लेकिन आधुनिक समय में नायलॉन और प्लास्टिक की डोर के उपयोग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसलिए, हमें पारंपरिक और पर्यावरण मित्र सामग्री का उपयोग करना चाहिए, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहे।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान और दान-पुण्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और समाज में एकता और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित करते हैं।